जै गुरुदेव रात को बारह बजे जब में जगा तो मैने देखा की  गुरुदेव के शरीर के टुकड़े टुकड़े हो गये हैं. घबरकेर  मैने आँखे बूँद कर ली , पाँच मिनिट में बाबा बोले ओ बाबा मैने आँखे खोल ली, गुरुदेव बोले डरा तो नहीं. उन्होने इस रूप के डरहन करा कर मुझे निर्भय कर दिया था.

एक दिन रात्रि को आठ बजे में गुरुदेव को भोजन करवा रहा था , तो हाता में कोर लेकेर आसमान की तरफ देख कर बात करने लगे मैने पूछा तो बोले आज  बड़ी छावनि मिल बनवाती गंगा गुजरात में काँप के हनुमंजी के यहाँ  हनुमानों की मीटिंग है और हमैन वहाँ जाना है. में बोला गाड़ी से चलेंगे बाबा बोले की में ही जॉवुगा और मुझसे कहा की यहाँ उउपर छत से हमैन नीचे ले चलो. मैने आसान बिछा दिया गुरुदेव उस पर जाकर गिर पड़े और उसी अवस्था में रात भर रहे . सुबह नो बजे चेतन अवस्था में आए और बोले भयया अब सो जाएँ में बोला पूरी रात ही तो सोए हैं.

बैर से 7 किमी पर ऐक संत रहते थे. हमसे गुरुदेव बोले उन संत से मिल आते हैं और अचेतनावस्था में चले गये. ऐक घंटे बाद मेरा हाथ पाकर कर बोले मेरा सर देखो चोट लगी है. मैने सर पर हाथ लगा कर देखा सर में चोट लगी थी . में बोला आप कहाँ होकर गये तो उन्होने उस जगह का पूरा नक्शा बता दिया हम सब आश्चर्या में पद गये और यह भी बताया की रास्ते में ऐक हनुमंजी के भी दर्शन कर आए हैं. फिर बोले समस्त हनुमंजी के चोला शृंगार कारवओ. हम बोले  मंदिर कहाँ हैं तो 111 हनुमानो की गिनती हाथोंहाथ करवा दि.Pहिर सभी जगह ऐक साथ चोला चड्दाया गया.  


कोटा में संदीप जी सत्यनारायण जी शर्मा तलवंडी के यहाँ गुरुपूर्णिमा कार्यक्रम में गुरुजी के साथ गया हुआ था यह 2004 की बात है . मेरे पेट के बाई तरफ ऐक अँधा फोड़ा हो गया था में उससे भूत परेशन तस . डॉक्टरों ने उसे केंसर बता दिया था . गुरुपूर्णिमा के बाद गुरुजी कारोली आ गये . कुछ दिन बाद जब में कारोली आशर्म पर दर्शन करने गया तो बाबा बोले की कहाँ से आया है ? मैने कहा जॅयैपर से आया हूँ केंसर का फोड़ा हो गया है. गुरुजी ने दया कर छ्होटी बाई से कहा बभूत ले कर आ और वह बभूत उन्होने जहाँ मेरे दर्द था वहाँ लगा डियोर बोले जा ठीक हो जाएगा. उसके बाद गुरुजी बीमार हो गये . बाबा को बहुत ज़्यादा तकलीफ़ में देखकर हम सभी चिंता करने लगे. तब वीरेन्द्रजी कारोली वालों की गाड़ी बुलाकर में सुनिलसोनी और सुनीलज़ीसोनी का छोटा भाई अवाम छोटिबाई को लेकेर कोटा चल दिए. रास्ते में गुरुजी बोले कहाँ ले जा रहे हो हम बोले आकी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए कोटा जा रहे हैं . तो गुरुजी बोले मुझे कुछ नहीं हुआ है और पूरे रास्ते हंसते हंसाते    चले. ऐसे गुरुदेव का वर्णन कहाँ तक करूँ में कर नहीं सकता. मुझे तो गुरुजी में भगवान शंकेर और श्री राम के दर्शन होते हैं. 
yeh anubhav gurubhai shri Ram Khiladiji ne bheja hai
Jai Gurudev

Comments

  1. परम संत श्री श्री 1008 श्री गौमती दास जी महाराज (सागर वाले) की जय हो🙏🏼🙏🏼

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  2. Shri gurudev bhagwan ki jai

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