जय गुरुदेव महाराज जी के चरणों मैं कोटि कोटि नमन http://books.google.co.in/books?id=QWsgAAAAMAAJ&q=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B8&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B8&hl=en&sa=X&ei=YUYSUuKmHYyMrAf99ICICw&ved=0CE8Q6AEwBQ
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जय गुरुदेव अन्नंत ब्रह्माण्ड नायक राजाधिराज अनंत विभूषित श्री गोमतिदास जी महाराज गुरुदेव भगवन के चरणों मैं समस्त परिवार सहित अनंत अनंत कोटि बार दंदोती प्रणाम करता हूँ। जो गुरुभाई 'सोभाग्य लक्ष्मी ' तंत्र padana चाहते हैं।, वे निचे लिखे लिंक पर क्लिक करें। जय बोलो सागर वाले बाबा की जय। http://www.scribd.com/doc/154765462/Saubhagya-Lakshmi-Tantra-Ed-Pradeep-Kumar-Rai
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जय गुरुदेव , अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक राजाधिराज श्री श्री अनंत विभूषित श्री गोमातिदास्जी महाराज गुरुदेव भगवन के चरणों में समस्त परिवार सहित अनंत अनंत कोटि पबार सादर प्रणाम करता हूँ। गुरुदेव की कृपा हम सब भक्तों पर हमेशा बरसती रहे , यही मंगलकामना करता हूँ। तपस्वी संत गौमती दास महाराज (सागर वालों) का जन्म बिहार राज्य की तहसील आंसमा पोस्ट पकरी वर्मा के ग्राम बुधोली में हुआ था। इनके जन्म का नाम शिवकुमार था। पिता का नाम रघुनंदन दास जी व माता का नाम श्रीमती जानकी देवी था। बाल्य अवस्था में इनके माता-पिता का देहांत हो गया था। इनका लालन-पालन बुआजी की छत्र-छाया में हुआ। बालक शिवकुमार प्रारंभ से ही विलक्षण प्रतिभाओं से विभूषित थे। इन्हें बच्चों की टोली में खेलना पसंद नहीं था। इन्हें स्कूल भेजा जाता, लेकिन ये स्कूल न जाकर गांव के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे हनुमानजी के मंदिर में पूजा करने लग जाते थे। यह भक्तिभाव इतना प्रबल हुआ कि 7 वर्ष की आयु में ही ये घर त्यागकर आसनपुर चले गए। वहां इन्होंने कोयले की खान में कार्य किया। यहां इनकी भेंट साधुओं की जमात से हो गई इसी जमात के साथ ये भी चल दिए। इन्ह...